custom Duty

Customs Duty वृद्धि से सौर इनवर्टर डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग पर प्रभाव:

 

बजट 2021 में, वित्त मंत्री ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सौर इनवर्टर पर Customs Duty, 5% से 20% और सौर लालटेन पर 5% से बढ़ाकर 15% करने का प्रस्ताव दिया। सरकार का इस कदम के पीछे का उद्देश्य था, कि Customs Duty में वृद्धि होने पर आयातित वस्तुओं का मूल्य बढ़ जायेगा, जो भारतीय निर्माताओं को “मेक इन इंडिया मुहीम को बढ़ावा देने को प्रोत्साहित करेगा|

कई अंतरराष्ट्रीय कम्पनियाँ, जो भारत में स्थित है, के पास पहले से ही अपने सौर इन्वर्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। किसी भी परियोजना में इनवर्टर की लागत कुल लागत की केवल 5% ही होती है, तो क्या उच्च शुल्क (higher customs duty) स्थानीय स्तर पर होने वाले निर्माण को प्रोत्साहित करेगा?

20% basic customs duty, 0.5% cess और 1% clearance charges (फ्रेट फारवर्डर के आधार पर) के साथ 2 फरवरी, 2021 से प्रभावी हो चुका है। सोलर इन्वर्टर के आयात पर लगने वाला कुल शुल्क 21.5% कार्ड्स पर है।

बड़े पैमाने पर परियोजना डेवलपर्स को Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) के सर्टिफिकेशन के साथ 5% की छूट मिल सकती थी। लेकिन अब MNRE छूट null और void है, और बड़े पैमाने पर परियोजना के लिए प्रभावी डेल्टा 15% है। इस बीच, लघु-स्तरीय परियोजनाओं में, डेल्टा लगभग 10% हो सकता है क्योंकि इन परियोजाओं को MNRE के द्वारा पहले कभी भी छूट नहीं दी गयी थी। हमें यह देखना होगा कि बाजार पर वास्तव में शुल्क कितना प्रभाव डालता है, क्योंकि tenders में आम तौर पर “change in law” clause होता है।

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर:

 

भारत में इन्वर्टर निर्माता अब तक इनवर्टर के आयातित घटकों (imported components) पर लगभग 10% -14% शुल्क का भुगतान कर रहे थे। लेकिन जब कि पूरी तरह से निर्मित आयातित इन्वर्टर पर शुल्क 5% ही था, जो कि सोलर इन्वर्टर निर्माणकर्ताओ के लिए एक बड़ा नुकसान है।

भारत में इन्वर्टर की आपूर्ति के लिए, इसको बनाने के लिए आवश्यक घटक जैसे कि PCB (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड), LCD (लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले) पैनल, इंसुलेटेड गेट बाइपोलर ट्रांजिस्टर (आईजीबीटी), या कनेक्टर की एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता होती है। इन घटकों को वर्तमान में आयात किया जा रहा है, और इन घटकों पर लगाया जाने वाला शुल्क मेक इन इंडिया पहल के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है|

एक लीडिंग स्ट्रिंग निर्माता के अनुसार, “चूंकि भारत में local supply chain नहीं है, हम  components पर शुल्क हटाने के लिए एमएनआरई से लगातार request कर रहे थे, अन्यथा आयातित इन्वर्टर पर सरकार की नवीनतम शुल्क वृद्धि का वांछित प्रभाव नहीं होगा। उदाहरण के लिए, हम 12% शुल्क के साथ यूरोप से IGBT आयात करते हैं, जो भारत में विनिर्माण को प्रोत्साहित नहीं करता है। इसके लिए मेक इन इंडिया ’तभी अनुकूल होगा जब इन्वर्टर के लिए BCD बढ़ाने के बजाय इन्वर्टर components पर शुल्क कम किया जाए|”

“सेल फोन उद्योग का उदाहरण लें, जो 2018 से ही फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग योजना (पीएमपी) है, जिसके तहत सेल फोन बनाना शुरू करने के लिए चार्जर, एलसीडी या टचपैड जैसे फोन के आवश्यक components पर कोई शुल्क नहीं है। 2019 के बाद, इन components पर शुल्क 2.5% तक बढ़ा दिया गया था, और वर्तमान बजट में, उन्होंने duty को 5% तक बढ़ा दिया है। सरकार को सौर उद्योग के लिए भी इसी के सामान योजना लानी चाहिए, केवल इनवर्टर के लिए ही नहीं बल्कि सहायक उद्योगों के लिए भी पेश करना चाहिए। एक ideal scenario में, duties को अभी हटाया जा सकता है, और क्वालिटी सुप्प्लिएर्स एवं लोकल मनुफक्चरर्स के बाद एक चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा सकता है। ”

इंडस्ट्री फीडबैक:

 

नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रणव आर मेहता ने कहा, “समय आ गया है कि भारतीय निर्माता ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनें और न केवल भारतीय बाजार बल्कि ग्लोबल बाजार की मांग को भी पूरा करें। यह बजट घोषणा हमें इस उद्देश्य के एक कदम और करीब ले जाएगी। ”

हिताची इनवर्टर सचिन बोरिसा के अनुसार, कस्टम्स ड्यूटी में वृद्धि भारतीय निर्माताओं को प्रभावित नहीं करेगी क्योंकि वे बहरी खरीद का ही उपयोग कर रहे हैं। “हम मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) आधारित उत्पादों के taxes पर पूरी तरह से प्रभाव की उम्मीद करते हैं। यह बाद में दोनों, इनवर्टर और ओईएम उत्पादों, के लिए दरों को बढ़ाएगा। “

बाय-आउट पार्ट, एक मशीन या उपकरण में इस्तेमाल होने वाला वह पार्ट है, जिसे मशीन या उपकरण निर्माता द्वारा स्थानीय तौर पर नहीं बनाया जाता है| उन्होंने यह भी कहा, “नए शुल्क शासन ने domestic players को प्रभावित नहीं किया है, क्योंकि यह ओईएम उत्पादों को प्रभावित करता है।”

K.N.Sreevatsa, FIMER इंडिया में कंट्री हेड हैं, ने “मेक इन इंडिया” मुहीम पर कहा,“सीमा शुल्क में वृद्धि डोमेस्टिक मनुफक्चरर्स के लिए एक वरदान है। अब तक, ड्यूटी स्ट्रक्चर ने दुनिया भर के निर्माताओं को लाभान्वित ही किया है। अब ड्यूटी में इस बदलाव के साथ, स्थानीय निर्माता महत्वपूर्ण रूप से लाभ प्राप्त करने के लिए खड़े हैं।”

श्रीवत्स के अनुसार, इनवर्टर परियोजना स्तर पर कुल परियोजना लागत का 5% से भी कम का गठन करते हैं, और चूंकि अधिकांश स्थानीय निर्माता 10% शुल्क का भुगतान कर रहे हैं, यहां तक ​​कि ड्यूटी में वृद्धि के साथ, अंतिम संख्या में भिन्नताएं 1-2% के रूप में महत्वहीन होगी।

उन्होंने आगे कहा कि “भारत में कई घरेलू निर्माता हैं जो यूटिलिटी-स्केल प्रोजेक्ट्स की आपूर्ति कर रहे हैं, इसलिए इस सेगमेंट के लिए कोई महत्वपूर्ण लागत वृद्धि नहीं होगी। जब यह C & I या आवासीय रूफटॉप सोलर सेगमेंट की बात आती है, तो घरेलू विनिर्माण आवश्यक पूरी उत्पाद रेंज को कवर नहीं करता है। ड्यूटी में 20% की वृद्धि के साथ, छोटे रूफटॉप सौर प्रतिष्ठानों की समग्र लागत पर थोड़ा प्रभाव पड़ेगा, लेकिन उपयोगिता-पैमाने के सौर खंड के लिए, ड्यूटी आयात के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए मैदान भी प्रदान करता है। ”

सही उद्देश्य के लिए गलत कदम:

 

सरकार का ड्यूटी को शुरू करने या बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य भारत में मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना था। इनवर्टर पर ड्यूटी के मामले में, यह उद्देश्य आधा सफल हो सकता है। ड्यूटी ने सौर इन्वर्टर को आयात करना पहले की तुलना में 5% से 15% तक महंगा कर दिया है। कई निर्माताओं के अनुसार, ग्लोबल आपूर्तिकर्ता शुल्क के प्रभाव को ऑफसेट करने के लिए इनवर्टर की कीमत को आसानी से समायोजित कर सकते हैं। जैसे विदेशी आपूर्तिकर्ता 15% सुरक्षा शुल्क के प्रभाव को बेअसर करने के लिए मॉड्यूल की कीमत को कम करने में सक्षम थे।

भारत में निर्माण को प्रभावी ढंग से प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार को आयातित components पर शुल्क को कम करना चाहिए ताकि निर्माता उत्पादन की लागत को कम कर सकें और बदले में, इन्वर्टर की कीमत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सके। जैसा कि उद्योग क्षेत्र ने सुझाव दिया है, सरकार बाद में चरणबद्ध विनिर्माण योजना को लागू कर सकती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन components को आयात करने के लिए शुल्क बढ़ाए जाने तक, सभी महत्वपूर्ण components भारत में बनाए जाने लगे हैं|

सरकार ने सोलर इनवर्टर आयात करना महंगा कर दिया है, लेकिन अभी यह भारत में भी बनाना सस्ता नहीं है।

 

सोलर इन्वर्टर पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से आये डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग में परिवर्तन एवं भविष्य में होने वाले परिवर्तनों के बारे में जानकारी थी| यदि आपको ये जानकारी पसंद आयी हो या आप किसी भी तरह का सुझाव देना चाहते हों, तो कमेंट बॉक्स में कमेंट के जरिये बता सकते हैं| महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए जुड़े रहें Ornate Solar से|